Saturday, 31 December 2011

Ashok Bahirwani Open letter in Hindi By AISPA - 29 December 2011

अशोक बहिरवानीजी का खुला पत्र Mumbai Mirror, के friendly संवाददाता दीप्तिमान तिवारी के नाम

प्रिय दीप्तिमान जी ,

Re: आपका समाचार रिपोर्ट शनिवार २४ दिसंबर २०११ के Mumbai Mirror में

आपको अब एहसास हुआ होगा कि मैं एक बहुत ही संवेदनशील इंसान हूँ और मैं किसी का विरोध करना पसंद नहीं करता , लेकिन मैं आपके ऊपर दिए गए विषय पर संदेहजनक लेख का विरोध करने के लिए मजबूर हूँ, क्योंकि यह गलत जानकारी से भरा है और वास्तविकता से बहुत दूर है. मुझे नीचे दर्शाने की अनुमति दें:

१ .मैं लगभग १२ .५ लाख Speakasian पनेलिस्ट्स की ओर से निंदा करता हूँ और तीव्र विरोध करता हूँ आपके विषय लेख के शीर्षक का.

Speakasia को एक धोखाधड़ी मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी कहना अवैध है. मैं खुद इस संचार के माध्यम से समझाने के लिए कर्तव्यबध हूँ, कि Speakasia धोखाधड़ी नहीं है , हाँ महोदय
मैं दोहराता हूँ Speakasia किसी भी तरह से एक मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी नहीं है.

२ . यह अवैध है, और आप श्री दीप्तिमान तिवारी, न्यायालय की अवमानना कर रहे हैं, क्योंकि आप एक न के बराबर विषय कुरेद रहे हैं और विशेष रूप से अधिक खतरनाक तरीके से है जबकि यह माननीय . उच्च न्यायालयों में न्यायाधीन है और माननीय. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हैं.

३ . आप श्री दीप्तिमान तिवारी उत्तेजित होकर, किसी भी कानूनी मंच में कंपनी के खिलाफ,कोई भी आरोप लगने से पहले, एक सच्ची इमानदार कंपनी को दोषी करार दे रहे हैं,

आप, श्री तिवारी, भारत की न्यायपालिका प्रणाली के मूलभुत नियमों का उल्लंघन करने के दोषी है, जिसमे स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हर व्यक्ति / संस्था निर्दोष है जब तक आरोप सिद्ध नहीं होता.

अब मैं कोशिश करता हूँ आपके लेख के हर एक वाक्यखण्ड (paragraph) पर चर्चा करने की .

a) सबसे पहले मैं जोरदार विरोध करता हूँ आपका Speakasia को एक धोखाधड़ी मल्टी लेवल कहने का , और २३ लाख भारतीय Speakasia का हिस्सा नहीं हैं. श्री तिवारी आप भ्रम में हैं और जो कुछ आपने रिपोर्ट किया है आपके भ्रमित मन का परिणाम है और इसलिए बहुत बढा चढ़ा कर कहा है.

b ) कहना क्षमा करें श्रीमान , रिपोर्ट में आगे बताया है, कि जांच Behind MLM नामक एक अज्ञात ब्लॉगसाईट के द्वारा किया है और इस लिए आपका कहना गलत है,कि "Crime Branch ने सबूत इकट्ठा किये ... ...इत्यादि "

c) यह कहना गलत है कि CEO श्री मनोज कुमारजी लगभग एक वर्ष से Wanted है, वास्तव में जुलाई के अंतसे श्री मनोज कुमार विदेश गए थे , यह लगभग ५ महीने होते हैं , एक साल नहीं. इसलिए मैं कहता हूं कि आप महोदय एक मतिभ्रमित स्तिथि में हैं.

d) मेरे आश्चर्य कि कोई सीमा नहीं थी जब मैंने पढ़ा कि, EOW जैसी एक प्रमुख जांच एजेंसी एक अज्ञात ब्लॉग के निष्कर्षों पर अपने बयान आधारित करेगी, और वो भी ब्लॉग के मालिक का पुर्वचरित या फिर पार्श्व भूमि की जांच किये बिना.

e) यह बड़ी दुःख की बात है, कि आपने अब तक Speakasia के व्यापार मॉडल को समझने की कोशिश नहीं की . यदि आपने मॉडल को समझने की कोशिश की होती , मुझे यकीन है कि आप रिपोर्ट नहीं करते, कि Mr Colibri का कार्य ,Speakasia के मॉडल पर है.

f) आपका बयान कि, Admatrix , बड़े पैमाने पे Speakasia के संचालन में शामिल था ,सरासर झूठ और बेबुनियाद है. मैं तीव्रता से इस बयान की निंदा करता हूँ

g) इस साल जुलाई में EOW ने ,हमारे COO श्री तारक बाजपाई जी और पांच अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया. यहाँ ध्यान दें, कि श्री बाजपाई कंपनी SAOL के एकमात्र अधिकारी थे , अन्य गिरफ्तार व्यक्ति सहयोगी थे, लेकिन कोई भी कंपनी अधिकारी नहीं .

h)अब तक हम जान चुके हैं, कि आप को Speakasia के बिजनेस मॉडल के बारे में ज्ञान नहीं है. मैं आप के साथ इस पर बहस नहीं करूँगा,जहाँ आप कोशिश करते हैं समझाने की ,कि कैसे ई पत्रिका(E-Magazine )के लिए सदस्यता भरकर, कोई भी ५२००० / - कमाता है..... इत्यादि. श्री तिवारी कमाई ,पनेलिस्ट को कंपनी की गतिविधियों में भाग लेना से होती थी. यहाँ निवेश पर कोई मुनाफा न ही था न है

i) कोई भी शिकायतकर्ता, श्री नवनीत खोसला सहित की शिकायत नहीं है, कि १२ मई 2011 से पहले उन्हें भुगतान नहीं किया है. हम सभी जानते हैं,कि क्यों हम में से किसी को भी १२ मई २०११ के बाद कंपनी द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा है , और अधिक विशेष रूप से २४ मई २०११ के बाद, RBI के २३ मई, २०११ के संन्देह्पूर्ण परिपत्र के परिणामस्वरूप, और मेरी तरफ से कोई टिप्पणी की जरूरत नहीं है.

j) आप आगे कहते है, कि कंपनी २००० करोड़ रुपए का एक बड़ा निवेश धोखाधड़ी चला रही थी . यदि आप श्री तिवारी और जांच अधिकारी पिलीये आँखों से पूरे मामले को देखेंगे, तो क्या हमारे पास कोई भी मौका है आपको तर्क दिखाने का या आपको समझाने का? अफ़सोस, मुझे अपने अगले बयान की निरर्थकता पता है, लेकिन मेरा कर्त्तव्य है,कोशिश करूँ ,कि सब लोग मामलों की सही स्थिति देखें. श्री तिवारी यहाँ कोई निवेश नहीं है और इसीलिए यहाँ कोई भी निवेश धोखाधड़ी नहीं हो सकती है. मुझे यकीन है कि आप मेरे साथ सहमत नहीं है.

k) आप अपने अगले वाख्याखंड में कहते है, कि महीनों तक मामला ठंडा चलने के बाद, EOW को Mr. Colibri के बारे में जानकारी प्राप्त हुई जब Behind MLM ने उनसे संपर्क किया . मुझे यकीन है कि यह श्री खोसला और Behind MLM के श्री Ozsoapbox के बीच हुई नयी नयी दोस्ती की वजह से है.

l) मुझे एक पल के लिए आपके लेख से भटकने की अनुमति दें, मुझे हाल ही में सूचना मिली कि श्री खोसला Behind MLM पर काफी सक्रिय है.
Ozsoapbox ब्लॉग के मालिक, श्री नवनीत खोसला से बहुत प्रभावित हैं ,जो उसे विभिन्न विचार विमर्श देते रहता है . श्री Ozsoapbox को भारतीय न्यायिक प्रणाली के बारे में अल्प या ना के बराबर ज्ञान है.

m) EOW को सबसे पहले पूरी तरह से कंपनी Mr Colibri के मालिकी की जांच करनी चाहिए थी ,इस समाचार लेख को डालने से पहले. कोई भी कंपनी कभी भी अपने निवेशकों के नाम सामने नहीं रखती है ,सभी कंपनियों की वेबसाइट पर केवल प्रमोटरों या मालिकों के बारे में लिखा होता है. Mr . Colibri के मालिकी की जानकारी , ब्राजील के ROC पर जाकर मिल सकती है,. शायद EOW श्री Ozsoapbox की मदद ले सकते हैं जो अब EOW के अनौपचारिक अन्वेषक है.

n) दुख की बात है कि EOW को गलत जानकारी देकर गुमराह किया गया है . उनको गुमराह किया है ,किसी अज्ञात ब्लॉगरने , जो , एक अन्य अज्ञात और निराधार ब्लॉगर कि रिपोर्ट पर कहानी बनता है , जो अंतिम विश्लेषण में बेकार बेतुकी बात निकलती है. . अब पूरी तरह से मज़ाक ,और यह विशेष ब्लॉगर Speakasia के बारे में निराधार झूठ पकाने के अलावा , कपटी कहानियों भी पकाने लगा है.

o) अगर यह सच भी है कि Mr . Colibri , ने वास्तव में Admatrix के Source Code का इस्तेमाल किया था, तो यह हम Speakasians को कैसे प्रभावित करता है ?. SAOL का Admatrix के साथ या Mr . Colibri, के साथ कभी भी किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है.

इस समाचार रिपोर्ट से क्या हासिल हुआ , कम से कम सभी Speakasians को काफी स्पष्ट है. इस रिपोर्ट को केवल सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता प्रक्रिया को विफल करने के लिए और अधिक खतरनाक ,कंपनी के खिलाफ अधिकारियों के मन में पूर्वाग्रह शक पैदा करने के लिए किया गया था. एक बार फिर EOW और मीडिया के बीच सांठगांठ को उजागर करता है जो खतरनाक तरीके से उनकी शक्ति का दुरूपयोग कर रहा है सामान्य जनता को झूठ और नकारात्मकता देने के लिए और न्यायपालिका के मन में पक्षपात लाना है.

श्री तिवारी मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ, कि अगर आप आपकी भयावह योजना में सफल हुए नकारात्मक तरीके से Speakasia मामले पर प्रभावित होने के लिए ,तो फिर आप १२.५ लाख Speakasians के हित को एक बड़ी क्षति पहुंचाएंगे , जिनका बुनियादी प्राथमिक संवैधानिक अधिकार एक आजीविका कमाने का ,पर सीधा असर होगा.

श्री तिवारी यहाँ उल्लेख करना गलत नहीं होगा,कि हर एक भारतीय जो Speakasia मॉडल में शामिल हुआ है,इसमें शामिल हुआ है , पैसे कमाकर अपनी जीवन शैली को बढ़ाने के लिए . EOW का मानना ,कि पनेलिस्ट्स जिन्होंने बहुत ज्यादा पैसे कमाए हैं,वे प्रबंधन का हिस्सा हैं, निराधार और सच्चाई से कोसों दूर है. कुछ पनेलिस्ट्स ने बहुत ज्यादा आय बनायीं है केवल इसलिए कि, वे एक लंबी अवधि के लिए मॉडल के साथ जुड़े हुए है और एक लंबे समय से व्यापार की गतिविधियों में भाग ले रहे हैं . मुझ जैसे पनेलिस्ट ने ,जिन्होंने कोई पैसा नहीं कमाया है केवल इसलिए क्योंकि हम मॉडल में शामिल हो गए उस समय जब अस्थायी रूप से मॉडल को बंद करने के लिए मजबूर किया गया था.

हम Speakasian पनेलिस्ट्स जोर जोर से चिल्ला रहे है कि हम सभी भारत के न्याय प्रिय नागरिक हैं और हम सब खुद पूरे Speakasian मामले की वास्तविक तथ्य जानने में रुचि रखते हैं.

जो हम समझ नहीं रहे हैं वो है

क्यों हमारे भुगतान करने की अनुमति नहीं दी जा रही है? खासकर जब कंपनी कह रही है कि वे हम पैनलईस्ट को भुगतान करना चाहती हैं. निश्चित रूप से जब तक सभी जांच हो रही है ,कंपनी को हम पनेलिस्ट्स को भुगतान करने के लिए अनुमति दी जा सकती है. वैसे भी पूरा मामला पनेलिस्ट्स के पैसों की सुरक्षा का है.

EOW ने अतीत में विभिन्न न्यायालयों में कहा है कि वे पनेलिस्ट्स के हित की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं. तो फिर क्यों अब वे पैनलइस्ट्स को गिरफ्तार करना चाहते हैं?

कब तक हमें जांच के ख़तम होने का इंतजार करना होगा? ऐसी जांच करने के लिए क्या कोई समय सीमा नहीं है , खासकर जब यह लोगों की इतनी बड़ी संख्या को प्रभावित करता है?

Speakasians हम देख सकते हैं कि मीडिया एक तरफा ढंग से मामले की रिपोर्ट करता आ रहा है और करता रहेगा . हमें समझने की जरूरत है हैं कि इस बार हमें और अधिक एकजुट होना चाहिए और कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहना चाहिए ताकि इन अंतिम क्षणों को पार करके , हम जीत का स्वाद ले सकें.

Source : http://www.aispa.co.in/viewhindi1.php?idd=44

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